Tuesday, May 18, 2010

अमृत को जहर न बनायें.......

आधुनिक भारत के उदय का अवसर है प्रदुषण मुक्त वातावरण में
इसका सूरज उदय हो, आने वाली पीढियों को हमे निरोगी, स्वस्थ्य
जीवन प्रदान करने में अपनी उपस्तिथि को साकार करे |. मनुष्य का
जीवन एवं उसका विवेक आज मनुष्य को मंगल ग्रह तक पंहुचा पाया
है क्यों न हम पर्यावरण संरक्षण कार्य में भी आगे आये |
१.जल जीवन एक अमृत है |
२.प्रदूषित जल संक्रामक रोगों का कारन है |
३.तीज ,त्योहारों और मेलो के अवसर पर जल की शुध्दता बनाए
रखे.
४.अशुद्ध जल प्राणी जीवन के लिए खतरा है |
५. नदी,तालाब,कुए, शुदा जल के मूल स्त्रोत है |
६.नर्मदा एवं अन्य नदियों के जल में साबुन का उपयोग न करें, यह जल को गंदा करेगा |
७.जलचर जीवो की रक्षा भी हमारा दायित्व है |
८. वृक्ष लगाये, जल बचाए, प्रकृति को समृद्ध बनाए. |
९. अपने स्वार्थो के लिए पर्यावण की बलि न चढ़ाये. |
१०. प्लास्टिक थिलियो और पूजन सामग्री नर्मदा एवं अन्य नदियों के जल में न बहाए. |
११. औद्योगिक जहर ,शहरों की गन्दगी,नदियों के जल में बहाने से पहले सोचे.|
१२.जल संवर्धन ही अकाल से मुक्ति है. |
पर्यावरण प्रदुषण की समस्या से आज सारा विश्व ग्रसित है |.जल
भूमि और वायु प्राणी जीवन का सार है ,अतः हमारा कर्तव्य है इसकी
रक्षा करना |आओ हम सब मिलकर इसकी रक्षा लिए आगे आये .|

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