सुमन की सुगंध चारों ओर विसरित होती है किन्तु वह दिखाई नहीं देती.बाग,बगीचे,वन,उपवन,ताल,तलैय्या,नदी,पहाड़,हरियाली सबपर्यावरण के साथी है.इनकी सुरक्षा करना मानव जाती का नैतिक दायित्व है.निसर्ग हमें बारम्बार चेतावनी देता है कितु हम उसे नज़रंदाज़ करते है.आज पर्यावरण के मित्र कम और शत्रु अधिक हो गये है.जिसका दंड भोगना निश्चित है.तो आइये आज से ही हम उसे बचाने का संकल्प लेकर उसके शुभचिंतक और "मित्र" बनकर उसे प्रदूषण से मुक्त कराने में अपना योगदान दे.
Saturday, September 4, 2010
रवि की रश्मियाँ: जिज्ञासा
रवि की रश्मियाँ: जिज्ञासा: "पतझड़ की एक संध्या में, बीहड़ में से एक मुसाफिर चला जा रहा था, पैरों तले रोंदते हुए पत्तों को, चरमराते हुए पत्ते ने प्रश्न पूछा, कौ..."
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