वृक्ष लगाओ तो पुण्य मिलेगा,
वृक्ष पालोगे तो सुख मिलेगा.
पर्यावरण की सुरक्षा हमारा नैतिक दायित्व भी है और कर्त्तव्य भी.प्रत्येक मनुष्य को अपने प्रारब्ध के अनुसार जन्म मिलाता है,पर कर्म करना उसके हाथ में होता है."गिव एंड टेक "का फार्मूला सभी जगह चलता है. यदि आप प्रकृति की रक्षा करोगे तो प्रकृति भी आपका ख्याल रखेगी.जन्म दिन मनाने के अनेक प्रकार होते है. कोई घर में मनाता है, कोई होटल में, तो कोई मंदिर में, तो कोई आउटिंग पर जाकर आदि-आदि.मेरे विचार में,वस्तुतः जब हम पैदा होते है तो सबसे छोटे होते हुए भी आयु के मामले में सबसे बड़े होते है. उस दिन हम सौ प्रतिशत आयु वाले होते है.जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है,हम हम बड़े तो होते है,पर हकीकत में हमारी आयु घटती है.मनुष्य उसे नहीं जानता. यदि वो ईश्वर द्वारा प्रदत्त इस सुन्दर वसुंधरा को हमेशा हरा भरा रखने का संकल्प ले तो प्रदूषण निरंतर कम होता जायेगा और मानव को शुद्ध वायु, शुद्ध जल अपने आप मिलता रहेगा और वह भी स्वस्थ रहेगा.विगत चार-पांच वर्षों से मै अपना जन्मदिन पौधा रोप कर मनाता हूँ, और अपने परिवार के सदस्यों का जन्मदिवस भी वृक्ष रोपण कर इस प्रकृति को हरा भरा रखने में एक बहुत छोटा सा योगदान करता हूँ.जबलपुर में कदम संस्था द्वारा प्रतिदिन पौधा रोपा जाता है.मैं कदम संस्था का सक्रीय सदस्य हूँ और "पर्यावरण मित्र" होने के नाते आप सबसे एवं सारे विश्व के भाई, बहनों, मित्रों से यह अपील करता हूँ की आप सब भी जहाँ कही भी हों अपने जन्मदिन पौधा रोपकर मनाये. आज मेरा जन्मदिन है. आज प्रकृति ने मुझसे एक पुण्य का कम करा लिया, मैंने जबलपुर में एन.सी.सी. कार्यालय के परिसर में पौधा रोपकर अपना जन्मदिन मनाया.मुझे उसमे इतनी ख़ुशी मिली जिसका जिक्र शब्दों से नहीं किया जा सकता.बस यही कह सकता हूँ कि हमारी उम्र तो कम होती जायगी पर वृक्ष की बढ़ती जाएगी और वो दिनों-दिन बढेगा,लोगो को छाया देगा,हवा देगा, आराम देगा.
वृक्ष हमारा दाता है,
हवा छाया औषधि दिलाता है.
नितिन देसाई "पर्यावरण मित्र"
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