Thursday, August 19, 2010

आजादी के मायने !


मै,विगत सप्ताह बाहर गया था.पंद्रह अगस्त को सारा देश स्वतंत्रता की ६३वी वर्षगाँठ मना रहा था. मैंने भी मनाई.बड़ा ही सुखद पल था.पंद्रह अगस्त को हमारे मन में एक अलग ही जज्बा होता है.आज़ादी के बाद हमने अपने पडोसी मुल्कों के मुकाबले काफी तरक्की की है.जिस ब्रिटेन के हम गुलाम थे आज उसकी आर्थिक हालत ख़राब है. उसकी विकास दर कम हुई है. पाकिस्तान की आर्थिक हालत किसी से छिपी नहीं है, उसकी विकास दर कम होने के साथ उसकी गिनती आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों में हो रही है. इसके विपरीत भारत के आर्थिक हालत अच्छे हुए है, विकास दर में बढ़ोत्तरी हुई है.विश्व में हमारी ताकत बढ़ी है.आई.टी.क्षेत्र में दबदबा बढ़ा है. अन्तरिक्ष विज्ञानं में हमने बहुत तरक्की की है,जिसका लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है.मेरा ऐसा मानना है कि आर्थिक दृष्ट्या हम ऊँचे उठे है, परन्तु नैतिक रूप से हमारा पतन हुआ है.अंग्रेजो ने हमसे हमारा कुर्ता, पजामा,धोती, साड़ी, टोपी, बंडी,खादी....वगेरह लेकर हमको पेंट, शर्ट, टाई,टी-शर्ट,जींस,बरमूडा, उपभोक्तावाद,व्याव्साईकता, फूट डालो राज करो की नीतियां...आदि विरासत में दी है.हम धीरे-धीरे पाश्चात्य शैली में विकसित होते चले गए है और अब  हम न हम अपनी संस्कृति टिका पा रहे है और न पूर्ण रूपेण पाश्चात्य  शैली अपना पा रहे है.
 प्रतिस्पर्धा बुरी बात नहीं है,परन्तु उसकी आड़ मे  सत्ता की भूख,अधिक लोलुपता,आवश्यकता से अधिक धन संग्रह,स्वार्थीपन,खुलापन,आपसी वैमनस्यता,भ्रष्टाचार,हमें देश भक्ति से दूर लेकर जा रहा है और हम दिन रात धन कमाने के रास्ते सोचते रहते है.जब हमारा देश ही नहीं रहेगा तो हम क्या करेंगे? शायद हम इस ओर नहीं सोच रहे है, और अपने स्वार्थो की पूर्ती में लगे हुए है.  विगत ६३  वर्षों से हम आज़ादी का जश्न मना रहे है, आगे भी मनाएंगे. मैंने लोगो को जश्न मानते देखा है,परन्तु आज ऐसा महसूस होता है कि हम लोग आज़ादी के नाम पर मात्र औपचारिकता निभा रहे है. आज  भी स्वतंत्र भारत में एक किशोरी को सरे आम निर्वस्त्र घुमाना,महिला खिलाडियों के साथ  दुर्व्यवहार करना, रास्ते पर चलती महिलाओं को अगवा कर उनका बलात्कार  करना... क्या यही आज़ादी के मायने है? यह देखकर मन विचलित हो जा जाता है कि क्या हमने आज़ादी इसलिए प्राप्त की है? यह देखकर हमे ऐसा लगता है कि हमारे रणबांकुरों का बलिदान व्यर्थ चला गया है.महारानी लक्ष्मी बाई,तात्या टोपे,सरदार भगतसिंह,चन्द्रशेखरआजाद,राजगुरु,खुदीरामबोस,चाफेकरबंधू,बलवंतफडके...और न जाने कितने वीरों ने अपने खून से सींच कर हमें यह आज़ादी दी है परन्तु हम है की उसको हलके ढंग में ले रहे है और उनके बलिदान को अपमानित कर रहे है.शायद हम लोगो की आत्मा मर चुकी है.चारो और बढ़ता आतंकवाद, नक्सलवाद,अलगाववाद,भ्रष्टाचार,जनसेवको द्वारा सत्ता का दुरुपयोग.. हमें नैतिक पतन की और ले जा रहा है.आज हम स्वतंत्रता का मतलब यह लेते है कि हमें जो करना है हम करेंगे, चाहे उचित हो या अनुचित! हमें नियम तोड़ना अच्छा लगता है और हम अपनी कॉलर पकड़कर कहते है की हम स्वतंत्र है! रेल फाटक बंद होने पर उसके नीचे से निकलना,प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी रेल में शौच करना,चलती बस मे से केले खाकर बाहर फेकना,जलते बीडी-सिगरेट के ठूंठे बिना बुझाये फेकना,नशे की हालत में वाहन चलाना, फुटपाथ पर सोते थके-हारे मजदूरों पर वाहन चढ़ाना,नो-पार्किंग वाले स्थानों पर वाहन पार्क करना,मित्रों के साथ बीच रास्तों पर खड़े होकर बातचीत करना, किसी बुजुर्ग ने टोकने पर चुप रह बुढ्ढे कहना,विवाहों/उत्सवो पर कर्कश ध्वनी में गाने बजाना,पतली प्रतिबंधित पौलीथीन में कचरा भरकर रास्तों पर फेकना,नदियों,तालाबों को प्रदूषित करना,कमजोर वर्ग को कपडे देने के बजाये उसके कपडे उतरवाना,अनुचित रूप से धन कमाना,खाने की वस्तुओं में मिलावट करना,गन्दी राजनीती से लोगो के दिलो को बांटना,रेव्ह पार्टियों में अश्लीलता,मौज-मस्ती करना,वाहनों पर पुरुष मित्रों के साथ दुपट्टा बांधकर असंयमित आचरण करना,बगीचों में युवक-युवतियों द्वारा अमर्यादित व्यव्हार त्योहारों पर भोंडे नृत्यों का प्रदर्शन करना.... आदि. अंत में कहना चाहूँगा कि एकघडी,आधी घडी, आधी से पुनि आध, नेता संगत "भाई" की करे कोटि अपराध.यह इंगित करता है कि स्वतंत्रता या आज़ादी के यही मायने है! 
                                                                                    नितिन देसाई "पर्यावरण मित्र"  

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